बसंत पंचमी भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण और उत्सवपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल बसंत पंचमी 14 फरवरी 2024 को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी का आयोजन वसंत ऋतु के आगमन को चिह्नित करता है और माँ सरस्वती की पूजा का अवसर प्रदान करता है। बसंत पंचमी के इस महान उत्सव का महत्व विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होता है, परंतु यह सभी जगहों पर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। तो आइये हमारी इस पोस्ट में हम जानेंगे कि बसंत पंचमी क्यों, कैसे और कब मनाई जाती है।
बसंत पंचमी के दिन को विभिन्न तरीकों में पूजा और उत्सव के रूप में मनाया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों मंदिरों और स्कूलों को सजाते हैं और समाज में सामूहिक रूप से पूजा और भोग का आयोजन करते हैं। इस दिन को बच्चों की प्रार्थनाओं मंत्रों और संगीत के साथ समर्पित किया जाता है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच सम्मान और प्रेम का वातावरण होता है। इसके साथ ही बसंत पंचमी का त्योहार पीले रंग के धार्मिक अर्थ से जुड़ा होता है। यह रंग इस उत्सव के लिए एक विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह चमकदार पीली धूप प्रकृति की चमक और जीवन की जीवंतता का प्रतीक है। इस मौसम के दौरान गाँवों में विशेष रूप से पंजाब में सरसों की हरियाली से भरी खेतों को पीले रंग से चमकते देखने को मिलता है जो उत्सव की भावना को और भी उत्तेजित करता है। पारंपरिक उत्सवों के रूप में लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं केसर का हलवा या केसर के साथ मिठे चावल पकाते हैं और भगवान को पीले फूलों से चढ़ाते हैं।
बसंत पंचमी का उत्सव वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। वसंत ऋतु का आगमन समृद्धि, खुशहाली और नई ऊर्जा का संचार करता है। यह ऋतु सुंदरता की बहार लेकर आती है और प्रकृति को नई जीवन की राह दिखाती है। इसीलिए, बसंत पंचमी के उत्सव के माध्यम से हम सभी वसंत ऋतु का स्वागत करते हैं और नए आरंभ की ऊर्जा को संबोधित करते हैं। इस दिन पर कई स्थानों पर विशेष रूप से समारोह आयोजित किए जाते हैं, जहां लोग मिलकर खुशियों का आनंद लेते हैं।
बसंत पंचमी के दिन, माँ सरस्वती की पूजा और उनकी अराधना विशेष महत्व रखती है। सरस्वती देवी को हिंदू धर्म में विद्या, विज्ञान, कला, और संगीत की देवी माना जाता है। इसलिए यह दिन शिक्षा, विद्या, और कला की देवी के रूप में माना जाता है। विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए यह एक विशेष मौका होता है अपनी शिक्षा और कला में वृद्धि करने का।
इस प्रकार, बसंत पंचमी हमारे लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो नई ऊर्जा, खुशहाली, और सजीवता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें विद्या, कला, और संगीत के महत्व को समझाता है और हमें नई शुरुआत के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा, यह हमें धार्मिक और सामाजिक समरसता और सौहार्द की भावना सिखाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी इस साल 13 और 14 फरवरी को मनाई जाएगी।
बसंत पंचमी का शुभ मुहरत की शुरुआत 13 फरवरी 2024 को 02:41 PM बजे होगी। जो 14 फरवरी 2024 को 12:09 PM तक रहेगा। ff
यह त्योहार शिक्षा, कला, और ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है। इसके साथ ही यह वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी है, जो प्रकृति के नए आरम्भ को संकेतित करता है।
इस दिन लोग सरस्वती माता की पूजा करते हैं, जिसमें विद्या के विभिन्न उपकरणों को पूजा किया जाता है, जैसे कि किताबें, पेंसिल, कलम, और संगीतीय उपकरण। बच्चे इस दिन विद्यालय में पहली बार आदर्श स्थान पर बैठकर अभिनंदन करते हैं।
बसंत पंचमी पर सरस्वती माता के प्रसाद के रूप में खीर, मूंग दाल, और सूजी का हलवा बनाया जाता है। ये सामान्यत: सफेद रंग के होते हैं, क्योंकि सफेद रंग सरस्वती माता को प्रिय है।
बसंत पंचमी भारतीय हिंदू परंपरा में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सरस्वती माता की पूजा और मां भारती को श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार वसंत ऋतु के प्रारंभ का संकेत भी है।
बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन विद्या की देवी माँ सारदा ( सरस्वती ) की पूजा की जाती है।
इस दिन लहसुन और प्याज, मांस और अंडे, और मदिरा । यह सभी विशेष भोजनों का त्याग धार्मिक करें।
इसे आप अपने बच्चों बच्चों या आस पड़ोस बच्चों के साथ मनाएं उन्हें अपने घर में बुलाकर पूजा आराधना करके उनके चरण छुएं और उन्हें दान करें जिसमें आप उन बच्चों को पेन, पेंसिल और नोटबुक जैसी स्टेशनरी वस्तुंए दे सकते हैं।
बसंत पंचमी भारत के विभिन्न राज्यों पंजाब , हरियाणा , महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और भी कई राज्यों राज्यों में मनाई जाती है।
बुधवार, 11 फ़रवरी 2026 : 01 : 18 PM
06:13 AM
06:37 PM
07:00 AM
07:28 PM
बुधवार, 04 सितंबर 2024 : 03 : 10 AM से गुरुवार, 05 सितंबर 2024 : 06 : 14 AM तक
मंगलवार, 03 सितंबर 2024 : 07 : 25 AM से बुधवार, 04 सितंबर 2024 : 09 : 47 AM तक
बुधवार, 04 सितंबर 2024 : 09 : 47 AM से गुरुवार, 05 सितंबर 2024 : 12 : 21 PM तक
नमस्कार मैं प्रकाश चंन्द आपका ज्योतिष आचार्य। मैं लगभग 25 वर्षों से ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा हुआ हूँ। मैंने काफी सारे लोगों के लिए सटीक भविस्यवाणी की है। साथ ही Today Rashifal in Hindi पर मैं डेली होरोस्कोप के ऊपर भविस्यवाणी करता हूँ। अगर आपको हमारे द्वारा दी गई। जानकारी पसंद आती है। तो आप इसे अपने सगे-संबंधो के साथ भी साझा करें। 🧡
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